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ढिग बूड़ा उतरा नहीं
ढिग बूड़ा उतरा नहीं, याहि अंदेशा मोहिं।सलिल मोह की धार में, क्या नींदरि आई तोहिं॥
कबीर
प्यार की आचार संहिता
प्यार को एकांत, छाँह और बिस्तर नहीं खोजना चाहिएप्यार को प्रमाण जुटाने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए
अमिताभ
रे भाई हरि विसराए बूड़ा
रे भाई हरि बिसराए बूड़ा का भासे में भूला।खोज गए रावन राजा का, तू नहीं बाकी तूला॥
मीतादास
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तोहरी नानी के हाँड़े मा
तू बदला दिन मा पाँच सूट हम ढाँकी लाज कछाड़े मा।तोहरी नानी के हाँड़े मा।
आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
भोली मुन्धि मा गब्बु करि
भोली मुन्धि मा गब्बु करि, पिक्खिवि पडरूवाइँ।चउदह-सइ छहुत्तरइँ, मुंजह गयह गयाइँ॥
मुंज
अपने दुख मा ना दुखी केहू
अँगने मा बाटइ कटाजुज्झ, पटकी कै पटका हाता मा।जेहका देखा निरदोस 'अनुज', सब ढूँढ़य दोस विधाता मा।
अनुज नागेंद्र
मन हस्ती मा चढ़त है
मन हस्ती मा चढ़त है, करमन टट्टू होय।नरक परै की विधि करै, मुकुति कहाँ ते होय॥
मीतादास
सपने मा नथुनी हेरानी
सपनेउ मा फिरि खोइ गएन तउ बहियन मा ना जइबोगर बहियन मा पहुँचि गएन तउ नथुनी नाइ देखइबो
जगजीवन मिश्र ‘जीवन’
अबकी चुनाउ मा
बन्दरन की फौज आइ गयी हइ जो गाँउ माकेतनउ बराउ फिरते भच्छि खइहैं पाँउ मा
जगजीवन मिश्र ‘जीवन’
अबकी जाड़ेन मा
अबकी जाड़ेन भओ हइ बुरो हालकुछु के घर मा बनइँ पकौड़ी कुछु के घर मा पूड़ी
जगजीवन मिश्र ‘जीवन’
दालि मा करिया है
अनहोनी होवइ दिन’हूँ मा लगइ कुबेरिया हैतउ भइया यहु जानि लेहेउ कुछु दालि मा करिया है
जगजीवन मिश्र ‘जीवन’
तमसो मा ज्योतिर्गमय
बुझी न दीप की शिखा अनंत में समा गई।अमंद ज्योति प्राण-प्राण-बीच जगमगा गई!