श्रीनरेश मेहता के बेला
रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं
मैंने साहित्य की किसी भी विधा में जब भी लिखा तब यह सोचकर नहीं लिखा कि मैं उक्त विधा की शर्तों को पूरा करने के लिए लिख रहा हूँ। …मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी गद्य भी लिखना चाहूँगा और आज ऐसा