शमीम उद्दीन अंसारी के बेला
दिल्ली के धड़कते दिल से गुज़रते हुए
किसी शहर का मुस्लिम इलाक़ा उस शहर की धड़कती हुई जगहों में से एक होता है, जहाँ आला दर्ज़े के शायरों, बावरचियों, हकीमों, द
कनॉट प्लेस के एक रेस्तराँ में एक रोज़
उस दिन दुपहर निरुद्देश्य भटकते हुए, मैंने पाया कि मैं कनॉट प्लेस में हूँ और मुझे भूख लगी है। सामने एक नया बना रेस्तराँ थ