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आलोक रंजन

1984 | सहरसा, बिहार

नई पीढ़ी के कवि और गद्यकार।

नई पीढ़ी के कवि और गद्यकार।

आलोक रंजन के बेला

24 सितम्बर 2025

भूले-भटके दिन : कुछ रूमानी टुकड़े

भूले-भटके दिन : कुछ रूमानी टुकड़े

मैंने अपने सबसे असुरक्षित क्षणों में जब-जब तुम्हें याद किया है, तब-तब यह सवाल आया कि बीतते समय के साथ मैं तुम्हारे लिए म

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