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शर्म पर ग़ज़लें

शर्म का एक अर्थ लज्जा,

हया, संकोच आदि है; जबकि एक अन्य अर्थ में यह दोषभाव या ग्लानि का आशय देता है। इस चयन में शर्म विषय से संबंधित कविताओं को शामिल किया गया है।

लाज नाहीं शरम

कृष्णानन्द कृष्ण

धन्य अहाँ, धन्य अहाँ अपने ढ़कैत

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सभकर मिजाज बाटे

गहबर गोवर्द्धन

लाख तोपलो पर उघरल तोपाई ना

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

तहरो अँखियन के मर

जौहर शफियाबादी

फाटि गेल छी

राम चैतन्य धीरज

हिन्दवी उत्सव 2026

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