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संस्कृत पर उद्धरण

बहस के स्वरूप को लेकर जितनी बहस संस्कृत के शास्त्रकारों ने की है, उतनी कदाचित् संसार की किसी अन्य भाषा के साहित्य में नहीं मिलेगी।

राधावल्लभ त्रिपाठी

संस्कृत के समाज में शास्त्रार्थ की शताब्दियों की परंपरा है; पर उसमें स्त्री की भूमिका पर बात कम हुई है, स्त्री की भूमिका भी कहीं है तो वह उपेक्षित रही है।

राधावल्लभ त्रिपाठी

महज संस्कृत में कुछ लिख देने से कोई वाक्य शास्त्र-वाक्य नहीं बन जाता।

महात्मा गांधी

पतंजलि के महाभाष्य से पता चलता है कि पाणिनि अत्यंत बुद्धिशाली आचार्य थे।

वासुदेवशरण अग्रवाल

हिन्दवी उत्सव 2026

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