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विवाह पर कवितांश

स्त्री-पुरुष युगल को

दांपत्य सूत्र में बाँधने की विधि को विवाह कहा जाता है। यह सामाजिक, धार्मिक और वैधानिक—तीनों ही शर्तों की पूर्ति की इच्छा रखता है। हिंदू धर्म में इसे सोलह संस्कारों में से एक माना गया है। इस चयन में विवाह को विषय या प्रसंग के रूप में इस्तेमाल करती कविताओं को शामिल किया गया है।

इस पृथ्वी पर जो गृहस्थ

धर्मनिष्ठ रहता है

वह स्वर्ग के देवगणों के

सदृश पाता है सम्मान

तिरुवल्लुवर

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