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विवाह पर गीत

स्त्री-पुरुष युगल को

दांपत्य सूत्र में बाँधने की विधि को विवाह कहा जाता है। यह सामाजिक, धार्मिक और वैधानिक—तीनों ही शर्तों की पूर्ति की इच्छा रखता है। हिंदू धर्म में इसे सोलह संस्कारों में से एक माना गया है। इस चयन में विवाह को विषय या प्रसंग के रूप में इस्तेमाल करती कविताओं को शामिल किया गया है।

तीन पत्र

राम चैतन्य धीरज

गौरी रहथु कुमारी

कालीकान्त झा ‘बूच’

कन्यादान

कालीकान्त झा ‘बूच’

दुलहिन

गोपालशरण सिंह