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पुल पर उद्धरण

संसार के सारे कर्म इसके पार करने के सेतु हैं। देखने में एक कर्म दूसरे से भिन्न है पर उन सब के मिलने से ही वह सेतु बनता है जो संसार के पार लगाता है।

लक्ष्मीनारायण मिश्र

पशु को हमने पीछे छोड़ा है, प्रभु को हमें आगे पाना है। हम पशु और प्रभु के बीच एक सेतु से ज़्यादा नहीं हैं।

ओशो

हिन्दवी उत्सव 2026

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