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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम भक्तिरूपी तेल में ज्ञानरूपी बत्ती भींगोकर सत्यरूपी चिराग जलाओ, देखोगे कितने फतिगें, कितने कीड़े, कितने जानवर, कितने मनुष्यों ने तुम्हें किस प्रकार घेर लिया है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद