लोर हर बात के गवाही बा
lor har baat ke gavahi ba
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
लोर हर बात के गवाही बा
lor har baat ke gavahi ba
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
लोर हर बात के गवाही बा।
लोर चुप्पे पिअल मनाही बा॥
दुःख के प्याली हो चाहे सुख के जाम,
लोर भर दी नयन सुराही बा॥
सोख्ता बन के छिपाइब कब ले,
दाग लगबे करी सियाही बा॥
मात पर मात खाके हँसते बा,
राज बे राज के बादशाही बा॥
दूह लीं खून सभ ठोपे-ठोपे,
ई त सरकार के सिपाही बा॥
झूठ के दुनिया में उल्टे बा कानून,
सोझ रास्ता चलल तबाही बा॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 38)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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