केहु अचके में अपना बना गइल बा
kehu achke mein apna bana gail ba
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
केहु अचके में अपना बना गइल बा
kehu achke mein apna bana gail ba
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
केहु अचके में अपना बना गइल बा!
आके आँखिन में सपना सजा गइल बा!!
भरल अँजुरी में पानी के ऐनक बनल
रूप आपन देखा के बिला गइल बा॥
दरद में बा हँसल दरद में बा रोअल—
दरद के अब अँजोरिया फूला गइल बा!!
मीत कहला के अमनख ना मानल कर
मोम के भीतरी डोरी बरा गइल बा।
केतना साधी, बहुत चीज साधे के बा—
एगो साधे में जिनगी ओरा गइल बा॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 27)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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