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योगेंद्र आहूजा

1959 | बदायूँ, उत्तर प्रदेश

सुपरिचित कथाकार। तीन कहानी-संग्रह प्रकाशित।

सुपरिचित कथाकार। तीन कहानी-संग्रह प्रकाशित।

योगेंद्र आहूजा के बेला

22 अप्रैल 2026

‘मालिक’ का मलबा

‘मालिक’ का मलबा

ख़ून कम कर अब कि कुश्तों के तो पुश्ते लग गए क़त्ल  करते  करते   तेरे  तीं   जुनूँ   हो   जाएगा [अब ख़ून करना रोक, लाशों की लकीरें लग चुकी है। (वरना) क़त्ल करते-करते तू पागल हो जाएगा।] — मीर

19 अप्रैल 2025

दो दीमकें लो, एक पंख दो

दो दीमकें लो, एक पंख दो

मैं आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, इस कार्यक्रम के आयोजकों और नियामकों का जिन्होंने मुझे आपके रूबरू होने का, कुछ बातें कर पाने का मौक़ा दिया। मेरे लिए यह मौक़ा असाधारण तो नहीं, लेकिन कुछ दुर्लभ ज़रूर है। ल

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हिन्दवी उत्सव 2026

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