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आलोचनात्मक लेखन

आलोचना किसी कृति, कृतिकार और उसके समय के मूल्यांकन की विधा है। मूल्यांकन की प्रक्रिया प्रतिमानों के निर्माण और फिर उसके आधार पर वास्तविक मूल्यांकन के दो पक्षों पर आधारित होती है। इन दोनों पक्षों को क्रमशः सैद्धांतिक और व्यवहारिक समीक्षा के रूप में जाना जाता है। नए मानदंडों की स्थापना के साथ आचार्य रामचंद्र शुक्ल को हिंदी आलोचना के इतिहास में केंद्रीय महत्त्व प्राप्त है। बतौर विधा आलोचना ने शुक्ल-पूर्व युग में प्रमुखता प्राप्त की और शुक्लोत्तर युग में इसका सर्वतोन्मुखी विकास हुआ।

1911 -1987

समादृत कवि-कथाकार-अनुवादक और संपादक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

1884 -1941

समादृत आलोचक, निबंधकार, साहित्य-इतिहासकार, कोशकार और अनुवादक। हिंदी साहित्य के इतिहास और आलोचना को व्यवस्थित रूप प्रदान करने के लिए प्रतिष्ठित।

1888 -1963

शुक्ल युग के सुप्रसिद्ध निबंधकार-समालोचक। साहित्य हेतु दर्शन-संबंधी युक्तियों के प्रयोग के लिए उल्लेखनीय।

सुप्रसिद्ध आलोचक और व्याख्याकार। कबीर और जायसी के अध्येता के रूप में उल्लेखनीय।

1899 -1968

पुरातत्वविद और कला-इतिहासकार। भारतीय कला-समीक्षा में उल्लेखनीय योगदान।

1905 -1988

प्रेमचंदोत्तर युग के समादृत कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार। गद्य में मनोविश्लेषणात्मक परंपरा के प्रवर्तक।

1917 -2007

आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवि। अपने जनवादी विचारों के लिए प्रसिद्ध। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

1930 -1966

सुप्रसिद्ध आलोचक, रंग-समीक्षक और गद्यकार। उनकी स्मृति में ‘देवीशंकर अवस्थी स्मृति सम्मान’ प्रदान किया जाता है।

1936 -1975

‘अकविता’ आंदोलन के समय उभरे हिंदी के चर्चित कवि। मरणोपरांत साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

1915 -1999

आधुनिक काल के महत्त्वपूर्ण आलोचक, चिंतन-प्रधान निबंधकार और संपादक। हिंदी साहित्य के अद्यतन इतिहास के संपादन के लिए भी उल्लेखनीय।

1906 -1967

हिंदी के महान साहित्यकार, पत्रकार, संपादक, आलोचक एवं छायावादी कविता के शीर्षस्थ।

1919 -2005

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तार सप्तक’ के कवि। आलोचना और नाट्य-समीक्षा में भी सक्रिय रहे।

1916 -1961

समादृत कवि-आलोचक। ‘नकेनवाद’ आंदोलन के तीन सूत्रधारों में से एक।

1926 -2019

अत्यंत समादृत भारतीय लेखक। हिंदी आलोचना के शीर्षस्थ आलोचक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

1929 -2005

समादृत उपन्यासकार-कथाकार और निबंधकार। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

1894 -1971

द्विवेदीयुगीन निबंधकार। ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादन और आलोचना में भी योगदान।

1917 -1991

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तार सप्तक’ के कवि। कथा-लेखन में भी सक्रिय रहे।

1880 -1936

हिंदी कहानी के पितामह और उपन्यास-सम्राट के रूप में समादृत। हिंदी साहित्य में आदर्शोन्मुख-यथार्थवाद के प्रणेता।

1930

सुप्रसिद्ध आलोचक और विद्वान प्राध्यापक। भक्ति और छाया काव्य पर चिंतन के लिए उल्लेखनीय।

1899 -1999

हिंदी-संस्कृत के विद्वान्, साहित्य-इतिहासकार, निबंधकार और समालोचक। हिंदी में संस्कृत साहित्य पर चिंतन के लिए उल्लेखनीय।

1844 -1914

भारतेंदुयुगीन प्रमुख निबंधकार, गद्यकार और पत्रकार। गद्य-कविता के जनक और ‘प्रदीप’ पत्रिका के संपादक के रूप में समादृत।

1864 -1938

युगप्रवर्तक साहित्यकार-पत्रकार। ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादक के रूप में हिंदी नवजागरण में महत्त्वपूर्ण योगदान।

1925 -1972

नई कहानी दौर के प्रसिद्ध कथाकार। नाट्य-लेखन के लिए भी प्रख्यात। संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित।

1929 -2013

‘नई कहानी’ आंदोलन के प्रमुख कहानीकार-उपन्यासकार। ‘हंस’ पत्रिका के संपादक के रूप में चर्चित। लेखन के शुरुआती दौर में एक कविता-संग्रह 'आवाज़ तेरी है' शीर्षक से प्रकाशित।

1951

आलोचक और शिक्षाविद्। प्रेमचंद-साहित्य के गंभीर अध्येता। संस्मारणात्मक कृति 'मेरी चिताणी' के लिए चर्चित।

1931 -2003

सुप्रसिद्ध काव्य-आलोचक और साहित्य-इतिहासकार। व्यास सम्मान से सम्मानित।

1893 -1963

हिंदी यात्रा साहित्य के जनक के रूप में समादृत लेखक, इतिहासकार, बौद्ध विद्वान और बहुभाषाविद्। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

1904 -1967

भारत के इतिहास, संस्कृति, कला एवं साहित्य के अधिकारी विद्वान। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत।

1873 -1947

इतिहासकार, आलोचक और निबंध लेखक। 'मिश्र बंधु विनोद' के रचनाकारों में से एक।

1908 -1994

शिक्षाविद, आलोचक, कला-समीक्षक, अनुवादक और रेडियो वार्ताकार।

1933 -2001

सुप्रसिद्ध आलोचक। कहानी आलोचना में अपने योगदान के लिए उल्लेखनीय।

1896 -1961

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार। महाप्राण नाम से विख्यात।

1907 -1979

समादृत समालोचक, निबंधकार, उपन्यासकार और साहित्य-इतिहासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।