Font by Mehr Nastaliq Web

पेड़ पर दोहे

इस विशिष्ट चयन में प्रकृति

के प्रतीक और जड़-ज़मीन-जीवन के संदर्भ के साथ पेड़ या वृक्ष कविता में अपनी ज़रूरी उपस्थिति दर्ज कराते नज़र आएँगे।

हरी डारि तोड़िए, लागै छुरा बान।

दास मलूका यों कहें, अपना सा जिब जान॥

मलूकदास

पीत वर्ण तन पूर्णता

जैसे खिला उजास।

अमलतास तुझको कभी

देखा नहीं हताश॥

जीवन सिंह

संबंधित विषय

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए