साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।
एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार॥
हुआ नहीं है कल कभी, मत ले कल का नाम।
जो कुछ है वो आज है, कल का कल क्या काम॥
समझ-समझ समझा नहीं, समझ नहीं थी यार।
वो तो मेरे पास है, ढूँढ़ रहा बेकार॥
आए सब बिन वस्त्र के, लड़ें कफ़न को आज।
साथ वही जाए कफ़न, जाए तख़्त न ताज़॥
आज यहाँ तो कल वहाँ, जग में फिरे फ़क़ीर॥
अच्छे दिन के आस में, नैनन बरसे नीर॥
हिम्मत सब में है नहीं, सच कहने की बात।
सच को सच कहता वही, जो सच पर दिन रात॥
सबको जाना एक दिन, भला बुरा क्या संत।
रहा सदा कोई नहीं, सबका होगा अंत॥