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प्रसिद्ध पर दोहे

साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।

एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार॥

निज़ाम फतेहपुरी
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हुआ नहीं है कल कभी, मत ले कल का नाम।

जो कुछ है वो आज है, कल का कल क्या काम॥

निज़ाम फतेहपुरी
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समझ-समझ समझा नहीं, समझ नहीं थी यार।

वो तो मेरे पास है, ढूँढ़ रहा बेकार॥

निज़ाम फतेहपुरी
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आए सब बिन वस्त्र के, लड़ें कफ़न को आज।

साथ वही जाए कफ़न, जाए तख़्त न ताज़॥

निज़ाम फतेहपुरी
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आज यहाँ तो कल वहाँ, जग में फिरे फ़क़ीर॥

अच्छे दिन के आस में, नैनन बरसे नीर॥

निज़ाम फतेहपुरी
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हिम्मत सब में है नहीं, सच कहने की बात।

सच को सच कहता वही, जो सच पर दिन रात॥

निज़ाम फतेहपुरी
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सबको जाना एक दिन, भला बुरा क्या संत।

रहा सदा कोई नहीं, सबका होगा अंत॥

निज़ाम फतेहपुरी
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