विभाजन पर बेला
विभाजन का अर्थ हैं बाँटा
जाना—बँटवारा। भारत-पाक विभाजन मानवीय इतिहास की क्रूर घटनाओं में से एक है, जिसकी कटु स्मृतियाँ हमें आज भी कचोटती हैं। इसके अतिरिक्त भी विभाजन के विविध स्तर हैं, जिनसे समय-समय पर मनुष्य-जाति और संस्कृतियाँ गुज़रती रही और रहती हैं। यहाँ प्रस्तुत है—विभाजन विषयक आधुनिक कविताओं से एक अपूर्व चयन।
सुनील दत्त की मानवीय विरासत
20 अक्तूबर 2001 को दत्त साहब (सुनील दत्त) से उनके ऑफ़िस में मिलने का मौक़ा मिला। शुरुआत में हमारी मुलाक़ात का वक़्त केवल
03 फरवरी 2026
गाँव-देहात वाला घर-दुआर-खेत-खलिहान : हिस्सेदारी बनाम ज़िम्मेदारी
गाँव-देहात वाला घर-दुआर। यहाँ हिस्सा लेने-देने का मसला गंभीर होता है और बहुत जटिल भी। यह दोधारी तलवार है। तमाम लोग तो है
31 जनवरी 2026
जब इतिहास ने साहित्य के दरवाज़े से अपनी आत्मा खोजी
हम बात नहीं करते 1947 की, क्योंकि उस साल की बातें करना आसान नहीं। उन रातों की बात करना, जब ट्रेनें लाश-गाड़ियाँ बन गई थी
‘मसरूफ़ औरत’ के बारे में
कला-साहित्य से जुड़ी दुनिया की बात करें तो हर युग में व्यक्तिगत स्तर पर सृजन करने वालों की तुलना में युग-निर्माताओं की त