कृष्ण पर सवैया

रोज न आइयै जौ मन मोहन

ठाकुर बुंदेलखंडी

जब तें दरसे मनमोहन जू

ठाकुर बुंदेलखंडी

प्रानन प्रेम की गाँस नहीं

ठाकुर बुंदेलखंडी