सत्य का विनाश नहीं होता। बीज जिस प्रकार सौ-सौ वर्षों तक समय, क्षेत्र और सुयोग के अभाव से सुप्त शक्ति होकर प्रतीक्षा करता है, सत्य भी उसी प्रकार सैकड़ों वर्षों तक प्रतीक्षा कर सकता है।
सत्य का विनाश नहीं होता। बीज जिस प्रकार सौ-सौ वर्षों तक समय, क्षेत्र और सुयोग के अभाव से सुप्त शक्ति होकर प्रतीक्षा करता है, सत्य भी उसी प्रकार सैकड़ों वर्षों तक प्रतीक्षा कर सकता है।