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उम्मीद पर ब्लॉग

उम्मीद अब भी बाक़ी है

उम्मीद अब भी बाक़ी है

एक एक दिन श्रीप्रकाश शुक्ल जी का फोन आया : ‘जवान होते हुए लड़के का क़बूलनामा’ संग्रह की प्रति तुरंत उपलब्ध करवाओ, ‘परिचय’ के अगले अंक में समीक्षा जानी है। मेरे पास अपने संग्रह की कोई कॉपी नहीं थी

निशांत

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