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जंगल पर गीत

जंगल एक आदिम उपस्थिति,

एक पारितंत्र और जीवन के स्रोत के साथ ही एक प्रवृत्ति का प्रतिनिधि है। इस चयन में जंगल विषयक कविताओं का संग्रह किया गया है।

समुझ ना आवे बात रे!

तैयब हुसैन पीड़ित

ओ गुटबाज

मनोज जैन

कवन बन गइलैं ललना हमार हो

रामजियावान दास ‘बावला’