सभी द्वैतवादी सिद्धांतों के साथ पहली कठिनाई यह है कि असंख्य सद्गुणों के भंडार, न्यायी तथा दयालु ईश्वर के राज्य में इतने कष्ट कैसे हो सकते हैं? यह प्रश्न हर द्वैतवादी धर्म के समक्ष है, पर हिंदुओं ने कभी भी इसे सुलझाने के लिए शैतान की कल्पना नहीं की।
सभी द्वैतवादी सिद्धांतों के साथ पहली कठिनाई यह है कि असंख्य सद्गुणों के भंडार, न्यायी तथा दयालु ईश्वर के राज्य में इतने कष्ट कैसे हो सकते हैं? यह प्रश्न हर द्वैतवादी धर्म के समक्ष है, पर हिंदुओं ने कभी भी इसे सुलझाने के लिए शैतान की कल्पना नहीं की।