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नाव पर गीत

कवियों ने नाव को जीवन

और गति के प्रतीक के रूप में देखा है। जीवन के भवसागर होने की कल्पना में पार उतरने का माध्यम नाव, नैया, नौका को ही होना है।

कइसे लेहीं उतराई हो

रामजियावान दास ‘बावला’

केवट बोलल रामचन्द्र से

रामजियावान दास ‘बावला’

नइया तू मत डोल

अन्नू रिज़वी