तुम्हारे भीतर यदि सत्य नहीं रहे; तब हज़ार बोलो, हज़ार ढोंग करो, हज़ार कायदा ही दिखाओ, तुम्हारे चरित्र से, तुम्हारे मन से, तुम्हारे वाक्य से उसकी ज्योति किसी भी तरह प्रकाशित नहीं होगी। सूर्य यदि नहीं रहे तो बहुत से चिराग भी अंधकार को बिल्कुल दूर नहीं कर सकते।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद