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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम्हारे मन से जिस परिमाण में विश्वास हटेगा; जगत् तुम पर उसी परिमाण में संदेह करेगा या अविश्वास करेगा, एवं दुर्दशा भी तुम पर उसी परिमाण में आक्रमण करेगी, यह निश्चित है। अविश्वास-क्षेत्र दुर्दशा या दुर्गति का राजत्व है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद