स्वर्ग-नरक तथा आकाश के परे, राज करने वाले शासकों से संबद्ध अनेक कथाओं अथवा अंधविश्वासों के द्वारा मनुष्य को भुलावे में डालकर, उसे आत्मसमर्पण के लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाता है। इन सब अंधविश्वासों से दूर रहकर, तत्वज्ञानी वासना के त्याग द्वारा जान-बूझकर इस लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है।