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कुँवर नारायण के उद्धरण

मुक्तिबोध जब 'फंतासी' की विधा में कुछ कहना चाहते हैं; तो इसका यह मतलब नहीं कि वे 'सामाजिकता' से पलायन कर रहे हैं, जिसका एक रूप 'फंतासी' भी है।