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कुँवर नारायण के उद्धरण

मुक्तिबोध की ही तरह शमशेर की कविताओं को भी आत्मसात् करने के लिए उनके राजनीतिक विचारों को ही नहीं; उनके साहित्यिक आदर्शों और मान्यताओं को समझना पहली ज़रूरत है, अन्यथा हम उस प्रतिभा को ही गौण मानेंगे जो उन्हें अनेक कवियों से बिल्कुल अलग करती है।