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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जो शून्य से आया है, वह अवश्य शून्य में ही मिल जाएगा। हममें से कोई भी शून्य से नहीं आया, इसलिए हम शून्य में नहीं मिल जाएँगे। हम अनंत काल से विद्यमान हैं और रहेंगे और विश्वब्रह्मांड में ऐसा कोई शक्ति नहीं है, जो हम लोगों का अस्तित्व मिटा सके।