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नवीन सागर

1948 - 2000 | सागर, मध्य प्रदेश

हिंदी के अत्यंत उल्लेखनीय कवि-कथाकार। ’नींद से लंबी रात’, ‘जब ख़ुद नहीं था’ और ‘हर घर से ग़ायब' शीर्षक से तीन कविता-संग्रह प्रकाशित।

हिंदी के अत्यंत उल्लेखनीय कवि-कथाकार। ’नींद से लंबी रात’, ‘जब ख़ुद नहीं था’ और ‘हर घर से ग़ायब' शीर्षक से तीन कविता-संग्रह प्रकाशित।

नवीन सागर का परिचय

मूल नाम : नवीन सागर

जन्म : 29/11/1948 | सागर, मध्य प्रदेश

निधन : 14/04/2000

नवीन सागर (जन्म : 20 नवंबर 1948 में सागर, मध्य प्रदेश) की श्रेष्ठता और कीर्ति का आधार उनकी कविताएँ और कहानियाँ हैं। उनकी उच्च शिक्षा सागर विश्वविद्यालय से हुई। वर्ष 1989 में उनका एक कहानी-संग्रह ‘उसका स्कूल’ तथा बाल-कविताओं का संग्रह ‘आसमान भी दंग’ संभावना प्रकाशन, हापुड़ से प्रकाशित हुआ। 1996 में उनका पहला कविता-संग्रह ‘नींद से लंबी रात’आधार प्रकाशन, पंचकूला से प्रकाशित हुआ। 14 अप्रैल 2000 को भोपाल में उनके आकस्मिक निधन के बाद 2001 में उनका दूसरा कविता-संग्रह ‘जब ख़ुद नहीं था’ कवि प्रकाशन, बीकानेर से और 2006 में तीसरा कविता-संग्रह ‘हर घर से ग़ायब’ सूर्य प्रकाशन मंदिर, बीकानेर से प्रकाशित हुआ। 2019 में उनकी ‘संपूर्ण कहानियाँ’ आईसेक्ट पब्लिकेशन, भोपाल से और 2020 में बच्चों-किशोरों के लिए कविताओं की एक किताब ‘तुम भी आना’ इकतारा ट्रस्ट के जुगनू प्रकाशन, भोपाल से प्रकाशित हुई। वह निधन से पूर्व, मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादेमी में कार्यरत रहे। उनकी याद में नवंबर 2007 में साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘कथादेश’ (संपादक : हरिनारायण) ने ‘नवीन सागर विशेषांक’ (अतिथि संपादक : रामकुमार तिवारी) प्रकाशित किया जिसमें हिंदी के कई उल्लेखनीय कवियों-लेखकों-आलोचकों ने नवीन सागर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार रखे।

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