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तोहार नयन सहज प्रेम बैन बोल गईल

tohar nayan sahj prem bain bol gail

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

तोहार नयन सहज प्रेम बैन बोल गईल

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

    तोहार नयन सहज प्रेम बैन बोल गईल।

    हमार नींन के कीवाड़ रैन खोल गईल॥

    तोहार रूप के अबरख भरल बा आँखिन में

    हजार फूल के बहार बनि के तोल गईल॥

    हवा सजोर उड़ल लेके इआद के चंदन

    दीया बुता ना सकल झिलमिला के डोल गईल॥

    धुआँ के धूर जमाना उड़ा रहल हरदम

    हमार दरद किरिन-गीत नभ मे घोल गईल॥

    'सतीश' भूल गईल रात दिन के सीमा

    तोहार हाट में हिरदया बिका बेमोल गईल॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन :अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 1)
    • रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
    • प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
    • संस्करण : 1996

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