शून्य से उठ के शून्य में मिल जाए के बा
shunya se uth ke shunya mein mil jaye ke ba
शिव संदेश
Shiv Sandesh
शून्य से उठ के शून्य में मिल जाए के बा
shunya se uth ke shunya mein mil jaye ke ba
Shiv Sandesh
शिव संदेश
और अधिकशिव संदेश
शून्य से उठ के शून्य में मिल जाए के बा
पहिले सुगन्धित फूल जइसे फुलाए के बा
प्रेम के पुजारी हम, प्रेम के गीत गाइले
बरखा जइसे इहाँ, प्रेम में बरस जाए के बा
लुटावे आएल बानी लेके खुशियन के फूल
घर घर में जाके, लोगन से लुटाए के बा
खाली धर्म आ अध्यात्म से कहाँ मिले ज्ञान
कुछ विज्ञान के भी गंगा में नहाए के बा
सत्य के खोज में व्याकुल बा शिव संदेश
कुछ नीमन कर के, प्रकृति में समाए के बा
- पुस्तक : बेचैन संदेश (भोजपुरी गजल-संग्रह) (पृष्ठ 28)
- रचनाकार : शिव संदेश
- प्रकाशन : भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2024
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