रउआ कइसे ई बतिया भुला जाइले
raua kaise ii batiya bhula jaile
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
रउआ कइसे ई बतिया भुला जाइले
raua kaise ii batiya bhula jaile
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
रउआ कइसे ई बतिया भुला जाइले।
लाख रोकीं हिया में समा जाइले॥
भर गईल बा सुगंधी हवा में गजब
तन में बगिया के फुलवा खिला जाइले।
दूर रहलो पर जादू के बाटे असर
मन के अंगना में बंसिया बजा जाइले।
बंद आँखिन में तूफान अइसन मचल
नीन में एगो दुनिया बसा जाइले।
लोर के अब समुन्दर ना खाली रही
अइसन निठुराई काहें, रोआ जाइले
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 6)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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