नींद के राह कहीं छूट रहल बा पाछे
neend ke raah kahin chhoot rahal ba pachhe
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
नींद के राह कहीं छूट रहल बा पाछे
neend ke raah kahin chhoot rahal ba pachhe
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
नींद के राह कहीं छूट रहल बा पाछे।
घाव टभकत रहे अब छूट रहल बा पाछे॥
आँख में उड़के भरल चारू ओर बा लुत्ती—
आग में रात कंहू फूंक रहल बा पाछे॥
नाँव हिरदया में रहे आजुतलक बन पाहुन
नाँववाला उहें अब रूस रहल बा पाछे॥
मीठ बोली के सबद गूंज रहल माथा में
सबद के रूप चयन लूट रहल बा पाछे॥
मत कहीं मोह के हर बात बड़ा धोखा बा
घाम में फूल चमन सुख रहल बा पाछे॥
मन धधााइल रहे कहिओ 'सतीश’ के साँचो
नेह के डोर तुनुक टूट रहल बा पाछे॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 12)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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