ना जूटी मन टूट गइल बा
na juti man toot gail ba
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
ना जूटी मन टूट गइल बा
na juti man toot gail ba
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
ना जूटी मन टूट गइल बा।
समय लुटेरा लूट गइल बा॥
केहू नइखे अपना बस में,
नाता रिश्ता छूट गइल बा॥
सभ घर देखीं एके लेखा,
प्रेम गगरिया फूट गइल बा॥
चलत हथौड़ा देहिया घन पर,
रेसा रेसा फूट गइल बा॥
मरदाही जीए में बाटे,
हिम्मत धोती खूंट गइल बा॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 46)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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