करेजा बा कठोर जब ले ना नरम होई
kareja ba kathor jab le na naram hoi
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
करेजा बा कठोर जब ले ना नरम होई
kareja ba kathor jab le na naram hoi
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
करेजा बा कठोर जब ले ना नरम होई
नयन में डारि द नयन बड़ा करम होई
ना पूछऽ, हम कहाँ के हई—कहाँ के हऊअ तूं-
हिया हिया से मिली परेम के जनम होई
अलगे अलगे रही बदरी गगन में टुकड़ा बन
धरा पर ना कबो बरसात के मौसम होई
प्रीत के गीत जे पहिले-पहिले लिखले होखी
हाथ में लोर से बोरल सजल कलम होई
बदल गइल बा सभे नाच रहल बा लंगटे
मनु के पूत भला एतना बेसरम होई
हरेक दुआर पर बों दीं गुलाब के लाली,
गमक उठी त लहू देह के गरम होई
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 37)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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