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होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस (Jorge Luis Borges) बीसवीं शताब्दी के उन विरल साहित्यकारों में हैं जिन्होंने कविता, कहानी, निबंध और दर्शन के बीच की सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया। वह केवल अर्जेंटीना के लेखक नहीं थे, बल्कि विश्व-साहित्य की एक ऐसी उपस्थिति थे जिनकी रचनाएँ समय, स्मृति, भाषा, भूलभुलैया, पुस्तकालय और अनंत जैसे विषयों को नए ढंग से देखने की दृष्टि देती हैं। आधुनिक कथा-साहित्य, उत्तर-आधुनिकता और जादुई यथार्थवाद की कई धाराओं पर बोर्खेस का गहरा प्रभाव माना जाता है।

बोर्खेस का जन्म 24 अगस्त 1899 को अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनोस आयरेस (Buenos Aires) में हुआ। उनका परिवार साहित्य और बौद्धिक वातावरण से जुड़ा हुआ था। बचपन से ही उन्हें अँग्रेज़ी और स्पेनिश दोनों भाषाओं का ज्ञान था। उनके पिता के निजी पुस्तकालय ने उनके भीतर पुस्तकों के प्रति गहरा आकर्षण पैदा किया। किशोरावस्था में वह यूरोप गए, जहाँ उन्होंने दर्शन, इतिहास और विश्व-साहित्य का गंभीर अध्ययन किया।

बोर्खेस की रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह छोटी कहानियों में अत्यंत जटिल दार्शनिक प्रश्नों को समेट लेते हैं। उनकी कहानियों में वास्तविकता और कल्पना एक-दूसरे में घुल जाती हैं। वह अक्सर ऐसे पात्रों और परिस्थितियों का निर्माण करते हैं, जिनसे पाठक को यह महसूस होता है कि संसार स्वयं एक विशाल भूलभुलैया है।

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में सबसे महत्त्वपूर्ण संग्रह है—Ficciones (1944). इस पुस्तक की कहानियाँ विश्व-साहित्य में क्लासिक का दर्जा रखती हैं। ‘The Garden of Forking Paths’, ‘The Library of Babel’ और ‘Pierre Menard, Author of the Quixote’ जैसी कहानियाँ समय, ज्ञान और साहित्य की प्रकृति पर गहरे प्रश्न उठाती हैं। विशेष रूप से ‘The Library of Babel’ में ब्रह्मांड को एक अनंत पुस्तकालय के रूप में कल्पित किया गया है, जहाँ सभी संभावित पुस्तकें मौजूद हैं। यह कहानी आधुनिक डिजिटल युग में भी अत्यंत प्रासंगिक प्रतीत होती है।

उनकी दूसरी महत्त्वपूर्ण पुस्तक ‘The Aleph (1949)’ है। ‘The Aleph’ कहानी में एक ऐसा बिंदु उपस्थित होता है जिसमें पूरा ब्रह्मांड एक साथ देखा जा सकता है। यह कल्पना बोर्खेस की दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि को प्रकट करती है। इसी संग्रह की अनेक कहानियाँ स्मृति और पहचान के प्रश्नों से जूझती हैं।

बोर्खेस केवल कथाकार ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट निबंधकार और कवि भी थे। उनकी पुस्तक Labyrinths (1962) ने अँग्रेज़ी दुनिया में उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। वहीं A Universal History of Infamy (1935) में उन्होंने इतिहास और मिथक को कल्पनाशील शैली में पुनर्लेखन किया। उनकी कविताओं में भी दार्शनिक गहराई और आत्मचिंतन दिखाई देता है।

जीवन के अंतिम वर्षों में बोर्खेस लगभग पूर्णतः दृष्टिहीन हो गए थे। विडंबना यह थी कि जिस लेखक ने पुस्तकालयों और पुस्तकों की अनंत दुनिया रची, वही धीरे-धीरे अंधकार में डूबता गया। फिर भी उन्होंने लेखन और व्याख्यान जारी रखा। वह National Library of Argentina के निदेशक भी रहे। दृष्टिहीनता ने उनके लेखन को और अधिक आंतरिक तथा चिंतनशील बना दिया।

बोर्खेस को अक्सर दार्शनिक कथाकार कहा जाता है। उनके साहित्य में फ़्रांत्स काफ़्का (Franz Kafka), मिगेल दे सर्वान्तेस (Miguel de Cervantes) और प्राचीन मिथकों का प्रभाव दिखाई देता है, लेकिन उनकी शैली पूरी तरह मौलिक है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि छोटी कहानी भी उतनी ही गहन और व्यापक हो सकती है जितना कोई महाकाव्यात्मक उपन्यास।

14 जून 1986 को जेनेवा (Geneva) में उनका निधन हुआ। किंतु उनका साहित्य आज भी विश्व भर के लेखकों, आलोचकों और पाठकों को प्रभावित कर रहा है। बोर्खेस की रचनाएँ हमें यह समझाती हैं कि साहित्य केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि वास्तविकता को देखने का एक नया तरीक़ा भी है। उनकी दुनिया में पुस्तकें जीवित प्राणियों की तरह हैं, स्मृतियाँ भूलभुलैया की तरह फैलती हैं, और मनुष्य लगातार अपने ही अस्तित्व के रहस्य को समझने का प्रयास करता रहता है।

23 अगस्त, 2021 को The Los Angeles Review of Books में प्रकाशित स्पैनिश भाषा के प्रख्यात लेखक होर्खे लुइस बोर्खेस का एक पुराना साक्षात्कार हाल ही में फिर से चर्चा में आया है। यह साक्षात्कार उनकी चिर-परिचित शैली—विनम्रता, विद्वत्ता और रहस्यमय बौद्धिकता—का एक अद्भुत उदाहरण माना जा रहा है।

1982 में, जब अमेरिकी लेखक Charles McNair और उनके मित्र Mark Childress न्यू ऑरलियन्स (New Orleans) में बोर्खेस से मिले, तब उनकी आयु 82 वर्ष थी। उस समय दोनों युवा लेखक लैटिन अमेरिकी जादुई यथार्थवादी साहित्य के गहरे प्रभाव में थे। बोर्खेस की रहस्यमय और संक्षिप्त कहानियाँ—जैसे ‘Tlön’, ‘Uqbar’, ‘Orbis Tertius’ और ‘The Garden of Forking Paths’—उनके लिए लैटिन साहित्यिक संसार की तरह थीं : छोटी, तीखी और अविस्मरणीय। 


बोर्खेस ब्यूनस आयर्स से Tulane University (New Orleans, USA) में व्याख्यान देने आए थे, जहाँ उनका विषय था—‘सौंदर्यशास्त्र और अर्थ की अवधारणा’। लेकिन न्यू ऑरलियन्स में जिस जगह पर वह सबसे अधिक जाना चाहते थे, वह थी Preservation Hall—बोर्बन स्ट्रीट के पास स्थित एक छोटा-सा, घुटनभरा कमरा, जहाँ आज भी पुराने अंदाज़ का डिक्सीलैंड जैज़ बजाया जाता है। वहाँ वह चुपचाप पीछे खड़े रहे और ‘जैज़ की उठती-गिरती लहरों’ को अपने ऊपर बहने देते रहे।


उस सुबह जब मैकनेयर और चाइल्ड्रेस उनसे फ़ेयरमॉन्ट होटल में मिले, तब उनके साथ युवा जापानी-अर्जेंटीनी सहयोगी मारिया कोदामा (Maria Kodama) भी थीं, जो बाद में उनकी दूसरी पत्नी बनीं। 1986 में बोर्खेस की मृत्यु के बाद अर्जेंटीना के संभ्रांत समाज को यह जानकर आश्चर्य और दु:ख हुआ था कि उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति मारिया कोदामा के नाम कर दी थी।

साक्षात्कार के दौरान बोर्खेस खुली खिड़की के पास तेज़ धूप में बैठे थे। पिछली रात सुने गए संगीत को याद करते हुए उन्होंने धीमी आवाज़ में प्रसिद्ध जैज़ सॉन्ग ‘St. James Infirmary’ के तीन अंतरे गुनगुनाए। उनकी अँग्रेज़ी उतनी ही सटीक, लयात्मक और नियंत्रित थी जितनी किसी संगीत रचना की धुन। उन्होंने अपने युवा साक्षात्कारकर्ताओं को भरपूर समय दिया और हर प्रश्न का धैर्यपूर्वक उत्तर दिया।

यह पुराना साक्षात्कार आज भी इसलिए याद किया जाता है, क्योंकि इसमें बोर्खेस केवल एक विश्वप्रसिद्ध लेखक के रूप में नहीं; बल्कि संगीत, स्मृति और भाषा के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखने वाले एक विनम्र मनुष्य के रूप में दिखाई देते हैं। 


मूल अँग्रेज़ी साक्षात्कार का हिंदी अनुवाद :


क्या कल रात आपने कोई सपना देखा?


मैं हर रात सपने देखता हूँ। सोने से पहले भी और जागने के बाद भी। जब मैं बिना मतलब की बातें करने लगता हूँ, तो समझ लीजिए कि मैं कुछ नामुमकिन चीज़ें देख रहा हूँ।

मुझे याद है कि एक सपने ने मुझे एक कहानी दी थी। मैंने बहुत ही उलझा हुआ और पेचीदा सपना देखा था, और जागने के बाद मुझे सिर्फ़ एक ही बात याद रही : “मैं तुम्हें शेक्सपियर की याददाश्त बेचता हूँ।” और इसी पर मैंने एक कहानी लिखी [ ‘ला मेमोरिया डी शेक्सपियर’ (La Memoria de Shakespeare)]।

शेक्सपियर—कितना शानदार नाम है, है ना? लेकिन वह काफ़ी बुरे लेखक थे, क्या आपको ऐसा नहीं लगता? एक आदमी जिसने लिखा हो, “इंग्लैंड, वह आधा-स्वर्ग (demi-Paradise)।” यह किसी भद्दे मज़ाक़ जैसा लगता है, नहीं? मेरा मतलब है, शेक्सपियर आपको हर वक़्त निराश करते हैं। वह बहुत ही अस्थिर (uneven) लेखक हैं; उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उनकी एक पंक्ति बहुत शानदार होती है, तो अगली ही पल वह सिर्फ़ लफ़्फ़ाज़ी (rhetoric) करने लगते हैं।

क्या आपको उनके नाटक देखने जाना पसंद है?

मुझे नाटक पढ़ना पसंद है, उन्हें देखना नहीं। पढ़ना मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। मैं पढ़ने की पूरी कोशिश करता हूँ। मैं किताबें ख़रीदता रहता हूँ और उनके बीच रहता हूँ; लेकिन ज़ाहिर है, अब मैं उन्हें पढ़ नहीं सकता।

एक किताब अपने आप में एक माहौल होती है, है ना? मैं किताबों से घिरा हुआ हूँ। कविताएँ पढ़ते-पढ़ते ही मेरी आँखों की रोशनी चली गई, और यह सब कुछ एक बहुत ही धीमी ढलती शाम (twilight) की तरह हुआ। बहुत ही धीमे। वह कोई बहुत दु:खद पल नहीं था। बस धीरे-धीरे लोग चेहराविहीन होने लगे, किताबों के चित्र ग़ायब हो गए और मैं आईने में ख़ुद को भी नहीं देख सका।

क्या आपको याद है कि आपने आख़िरी चीज़ क्या देखी थी?

आख़िरी चीज़ जो मैंने देखी थी वह पीला रंग था। ऐसा इसलिए क्योंकि जो दो रंग सबसे पहले ग़ायब हुए, वे काले और लाल थे। लोगों को लगता है कि अंधे लोग अँधेरे में रहते हैं। पर ऐसा नहीं है। सबसे पहले जो रंग उनसे छिनता है, वह काला है। मैं काले और लाल रंग के लिए तरसता हूँ। काश मैं हल्के नारंगी रंग की रंगत वाला गहरा लाल रंग (scarlet) देख पाता।

अब मैं एक चमकती हुई मटमैली, नीली या हरी धुँध के बीच रहता हूँ। लेकिन वह धुँध हमेशा चमकदार होती है।

मेरे पिता की आँखों की रोशनी भी चली गई थी, मेरी अँग्रेज़ दादी की मौत अंधेपन में हुई, और मेरे अँग्रेज़ परदादा की भी। मुझे पता है कि मैं अपनी पीढ़ी का चौथा अंधा व्यक्ति हूँ। मुझे पहले से मालूम था कि मेरी क़िस्मत में क्या लिखा है।

क्या आप ब्रेल (Braille) पढ़ते हैं?

नहीं, और मेरे लिए यह बहुत दु:ख की बात है। अगर मैं ब्रेल पढ़ पाता, तो इसने मेरी पूरी ज़िंदगी बदल दी होती। लेकिन अब मैं बहुत बूढ़ा हो चुका हूँ। मेरे हाथ अब इसे सीखने के लिए बहुत बूढ़े हो गए हैं।

आपने एक बार कहा था कि काश आप कभी अपने पिता की उस लाइब्रेरी से बाहर न निकले होते, जहाँ आपने अपना बचपन बिताया था।

देखा जाए तो, हक़ीक़त यह है कि मैं वहाँ से कभी बाहर निकला ही नहीं। मैं आज भी वहीं हूँ। और यहाँ भी। मैं आज भी वही किताबें पढ़ता हूँ जो मैंने लड़कपन में पढ़ी थीं। हर बार जब मैं उन्हें पढ़ता हूँ, वे बदल जाती हैं। और ज़ाहिर है, वे मुझे भी बदल रही हैं।

मेरे घर पर मेरी ख़ुद की लिखी एक भी किताब नहीं है, और न ही कोई ऐसी किताब है जो मेरे बारे में लिखी गई हो। मुझे मुश्किल से ही याद रहता है कि मैंने क्या लिखा है। मैं दूसरे और बेहतर लेखकों को पढ़ता हूँ। अगर मैं अपनी ही लिखी चीज़ें दोबारा पढ़ूँ, तो शायद मैं निराश हो जाऊँ। मैं बस लिखना जारी रखना चाहता हूँ। मैं ख़ुद को हतोत्साहित (discourage) नहीं करना चाहता।

अब आप कैसे लिखते हैं?

मैं हर वक़्त सपने देखता रहता हूँ, योजनाएँ और तरक़ीबें बनाता रहता हूँ। लोग मेरे पास आते हैं और मैं उन्हें बोलकर लिखवाता हूँ, यानी dictate करता हूँ। मैं बस यही कर सकता हूँ। मेरा काम करने का तरीक़ा बहुत बिखरा हुआ है। मेरा कोई तय तरीक़ा नहीं है। बस सब कुछ बेतरतीब है। मेरे बारे में हर चीज़ बेतरतीब ही है।

मैं पूरी कोशिश करता हूँ कि एक सरल शैली में लिखूँ। मैं आसान शब्दों का इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश करता हूँ और शब्दकोश (dictionary) का ध्यान रखता हूँ। मुझे लगता है कि मेरा लेखन ऊपर से देखने में सरल है। मैं लिखने के लिए अपने भीतर एक तरह की ज़रूरत, एक बेचैनी महसूस करता हूँ। मैं उसी ज़रूरत को पूरा करने के लिए जीता हूँ; वह चीज़ मुझे परेशान करती रहती है, लेकिन जब मैं उसे लिख लेता हूँ, तो फिर मुझे उसकी चिंता नहीं होती।

क्या आपने कभी उस ज़रूरत को पूरी तरह संतुष्ट किया है?

सच तो यह है कि नहीं, इसलिए मैं लिखना जारी रखता हूँ।

अभी आप क्या लिख रहे हैं?

बहुत सारी चीज़ें। मुझे अभी बहुत सारी किताबें लिखने के लिए और जीना होगा। मुझे 18वीं शताब्दी के स्वीडिश दार्शनिक, वैज्ञानिक, धर्मचिंतक और रहस्यवादी इमैनुएल स्वीडनबॉर्ग [Emanuel Swedenborg (1688–1772)] पर एक किताब लिखनी है, और कविताओं की एक किताब, और कहानियों के एक संग्रह पर काम करना है। मारिया कोडामा और मैंने साथ मिलकर पुरानी अँग्रेज़ी (Old English) सीखी थी, और अब हम पुरानी नॉर्स (Old Norse) भाषा सीख रहे हैं। ये बहुत ही दिलचस्प भाषाएँ हैं।

आपकी पसंदीदा भाषा कौन-सी है?

मुझे लगता है कि मैं अँग्रेज़ी और जर्मन में से किसी एक को चुनूँगा, लेकिन अगर मुझे आइसलैंडिक (Icelandic) आती तो मैं उसे चुनता। मुझे लगता है कि स्पेनिश थोड़ी बोझिल भाषा है। उदाहरण के लिए, रुडयार्ड किपलिंग [Rudyard Kipling (1865–1936)]  की एक पंक्ति है : “We have ridden the low moon out of the sky.” आप स्पेनिश में चाँद पर सवार होकर उसे आसमान से बाहर नहीं ले जा सकते। वह भाषा इसकी अनुमति नहीं देती। आप कितने भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म अँग्रेज़ी बोलने वाले माहौल में हुआ, है ना? यह एक अद्भुत भाषा है।

अपनी कृतियों का अँग्रेज़ी अनुवाद पढ़कर कैसा लगता है?

अनुवादक उसे (मूल लेखन से) कहीं ज़्यादा बेहतर बना देते हैं।

आप ख़ुद अँग्रेज़ी में रचना क्यों नहीं करते?

मैं अँग्रेज़ी का बहुत ज़्यादा सम्मान करता हूँ। मेरी क्या बिसात कि मैं अँग्रेज़ी के साथ छेड़छाड़ करूँ?

क्या आप प्रेरणा (Inspiration) में विश्वास रखते हैं?

हाँ। मुझे लगता है कि कम से कम मेरे मामले में, चीज़ों की शुरुआत प्रेरणा से ही होती है। कुछ ऐसा जिसे हम ‘पवित्र आत्मा’, ‘काव्य-देवी’ (muse), ‘महान् स्मृति’ या ‘अवचेतन मन’ कह सकते हैं। जब मैं कविता लिखता हूँ, तो मैं किसी ऐसी चीज़ के बारे में सोचता हूँ, जो बहुत सीधी और निजी हो। मेरे देश में बहुत से लोग मेरी कविता नापसंद करते हैं और मेरे गद्य (prose) का आनंद लेते हैं, लेकिन मेरे लिए मेरी कविता मेरे गद्य से कहीं मेरे अधिक क़रीब है।

गद्य के मामले में, मुझे एक कहानी, एक प्लॉट बनाना पड़ता है और पात्र गढ़ने पड़ते हैं। फिर जब मुझे कोई विचार मिलता है तो मैं आराम से बैठकर काम शुरू करता हूँ। मैं कभी भी अपनी निजी राय को अपने काम के बीच नहीं आने देता। जब मुझे कोई प्लॉट मिल जाता है तो मैं यह देखता हूँ कि इसे बीसवीं सदी की शुरुआत में रखा जाए या ‘अरेबियन नाइट्स’ जैसी किसी दुनिया में या फिर इसे अभी हाल की घटना बनाया जाए? शायद मैं स्कॉटलैंड में हूँ, या अमेरिका में, या ब्यूनस आयर्स में...

आपने अवचेतन मन का ज़िक्र किया। मनोविज्ञान (Psychology) के बारे में आप क्या सोचते हैं?

माना जाता है कि हर किसी को अपने पिता या अपनी माँ से नफ़रत होती है। मेरे पिता सोचते थे कि यह एक निष्फल विज्ञान (futile science) है। मुझे वे लोग समझ नहीं आते जो दावा करते हैं कि उन्होंने मनोविज्ञान में महारत हासिल कर ली है। मुझे उन पर तरस आता है—ख़ुद में इतना खोए रहना और अपना ही विश्लेषण करते रहना। मैं मुश्किल से ख़ुद को जानता हूँ। कोई नहीं जानता।

मुझे लगता है कि हमने एक बहुत महत्त्वपूर्ण विज्ञान खो दिया है : नैतिकता (Ethics). लोग झूठ बोलने की प्रशंसा करते हैं। वे धोखाधड़ी और अमीर होने की तारीफ़ करते हैं। जो चीज़ें वास्तव में महत्त्वपूर्ण हैं, वे हैं—इंसान द्वारा पढ़ी गई किताबें, उसकी भावनाएँ और उसके कर्म। राय (Opinions) महत्त्वपूर्ण नहीं होतीं, वे तो आती-जाती रहती हैं। मैं राष्ट्रवादी रहा हूँ, कम्युनिस्ट रहा हूँ और एक शांत अराजकतावादी (anarchist) भी।

क्या आपका मतलब है कि अर्जेंटीना ने अपनी नैतिक चेतना खो दी है?

उम्मीद करते हैं कि यह सिर्फ़ एक स्थानीय समस्या हो। मेरा देश एक उम्मीदहीन देश है। हमारे पास बस यही एक सच्चाई बची है कि हम लाचार हैं। कोई किसी चीज़ की उम्मीद नहीं करता। रिश्वतख़ोरी, भ्रष्टाचार, अपहरण, लोगों का ग़ायब होना... हम लगातार नीचे गिर रहे हैं। अगर हमारे पास लोकतंत्र होता तो हम अर्जेंटीना के राष्ट्रपति के रूप में हुआन पेरोन [Juan Perón (1895–1974)] जैसे किसी मूर्ख या पाखंडी को कैसे चुन लेते और वर्तमान में आदमी तो पूरी तरह अक्षम है। वह सक्षम क्यों हो?

आप नैतिकता (ethics) को कैसे परिभाषित करते हैं?

मुझे उसे परिभाषित करने की ज़रूरत नहीं है, वे हमारे भीतर गहराई में बसी होती हैं। मेरा मतलब है, जब मैं कोई काम करता हूँ तो मुझे पता होता है कि मैं सही हूँ या ग़लत। हर बार जब मैं कुछ करता हूँ, मुझे पता होता है कि मैं सही कर रहा हूँ या ग़लत। कम से कम मुझे ऐसा ही लगता है। यह एक अहसास है, एक आंतरिक अहसास।

क्या यह एहसास धार्मिक भी है?

मैं ऐसा महसूस नहीं करता और मैं इसकी चिंता भी नहीं करता। देखिए, मैं एक ख़ुश-मिज़ाज और बेपरवाह संशयवादी (agnostic) हूँ। मुझे लगता है कि हर दिन हम स्वर्ग में होते हैं, नरक में होते हैं, हम हर जगह होते हैं, है ना? मैं कुछ महसूस करता हूँ, शायद कुछ उम्मीद भी करता हूँ, पर आख़िर में ये सब निजी सवाल हैं।

एक चीज़ जिसका मैंने अनुभव किया है, वह है ‘जादू’। शायद मैंने इसके अलावा और कुछ अनुभव नहीं किया। मुझे हैली का धूमकेतु (Halley’s Comet) याद है, जब मैं बच्चा था। मुझे लगा कि यह ब्यूनस आयर्स के शताब्दी समारोह का हिस्सा है। पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठा था। मुझे लगा कि यह एक तरह की ईश्वरीय आतिशबाज़ी है।

क्या आप आने वाले साल 1986 में उस धूमकेतु (comet) की वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं?

नहीं, बिल्कुल नहीं। अगर मैं अभी मर सकूँ, तो वही बुद्धिमानी होगी, है ना? यहाँ न्यू ऑरलियन्स में बैठकर आपसे बात करते हुए? इसके अलावा मैं क्या कर सकता हूँ? क्या एक लंबी बीमारी का इंतज़ार करूँ? मैं जल्दी मरना पसंद करूँगा।

लेकिन आपको अभी और कहानियाँ लिखनी हैं।

हाँ, लेकिन मुझे लगता है कि मैं अपनी सबसे अच्छी कहानियाँ सुना चुका हूँ। मैं 82 साल का हूँ। मेरे पास कोई भविष्य नहीं बचा है, सिवाय एक सपनों वाले भविष्य के, जो शायद एकमात्र संभव भविष्य है। मेरी माँ 99 साल की उम्र में मरी थीं, और उन्हें 100 साल का होने से डर लगता था।

जब आप 101 साल के होंगे, तो आप अगली सदी देखेंगे।

ओह, उम्मीद करते हैं कि ऐसा न हो। इतने आशावादी मत बनिए।

क्या आप अपने काम के ज़रिए जीवित नहीं रहेंगे?

ख़ैर, मैं तो वहाँ रहूँगा नहीं। मैं अनुपस्थित रहूँगा। मैं किसी दूसरी दुनिया में रहूँगा और मुझे इसकी ज़रा भी परवाह नहीं है। मुझे लगता है कि मेरा काम अपना रास्ता ख़ुद ढूँढ़ लेगा।

क्या आप चाहते थे कि आपको प्रसिद्धि (Fame) और पहले मिल जाती?

नहीं, मुझे इसमें मज़ा नहीं आता। मैं इससे असहज हो जाता हूँ। जैसा कि मेरे पिता ने कहा था, “मैं एक अमीर लेकिन अदृश्य आदमी बनना चाहूँगा।” मैं कभी कॉकटेल पार्टियों या किसी भी तरह की सभाओं में नहीं जाता... हाथ मिलाना, वही हाथ, बार-बार ‘आपसे मिलकर ख़ुशी हुई’ कहना... लोगों से मिलना जबकि मैं उनके चेहरे नहीं देख सकता। यह वास्तव में भयानक है। आपको मुस्कुराना पड़ता है, आपको आभारी होना पड़ता है।

तो क्या यात्राएँ आपके लेखन में बाधा डालती हैं?

इसके विपरीत, मैं बहुत आभारी हूँ। मैं देशों को महसूस कर सकता हूँ। मैंने मिस्र (Egypt) को देखा नहीं है, लेकिन मैं वहाँ रहा हूँ। मैंने जापान को नहीं देखा, पर मैं जापान गया। यही सबसे बड़ा अंतर है। मुझे नहीं पता कि यह इंद्रियों से आता है या शायद इंद्रियों से परे कुछ है। और अब यहाँ होना, अमेरिका में होना, मुझे इतना अविश्वसनीय और अद्भुत लगता है—ब्यूनस आयर्स में होने से बिल्कुल अलग। वह कितना नीरस शहर है।

आप अमेरिका दोबारा कब आएँगे?

जितनी जल्दी हो सके। मैं पूरी दुनिया घूमना चाहता हूँ, और मैं घर भी जाना चाहता हूँ। यह यात्रा का ही एक हिस्सा है। लोग किसी भी पल मेरा इंतज़ार कर सकते हैं या फिर मुझसे डर सकते हैं।

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अमेरिकी उपन्यासकार चार्ल्स मैकनेयर (Charles McNair) और मार्क चाइल्ड्रेस (Mark Childress) द्वारा 1982 में लिया गया होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार | अनुवाद और भूमिका : राकेश कुमार मिश्र | मूल साक्षात्कार : The Los Angeles Review of Books, 23 अगस्त 2021, स्रोत : https://lareviewofbooks.org/article/ill-be-in-another-world-a-rediscovered-interview-with-jorge-luis-borges/ 

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