मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के उद्धरण
पराधीन देश का नागरिक होने की वजह से आपके सामने बहुतेरी दुश्वारियाँ थीं। एक स्वतंत्र देश के नागरिक के नाते आप पर नई ज़िम्मेदारियाँ हैं।
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एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश का मूल तत्व यही है कि जाति, धर्म या समुदाय के भेद के बिना, यहाँ सभी को तरक़्क़ी के बारबर मौक़े हासिल हों।
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आज़ाद भारत में आपको राष्ट्र की ज़रूरतों के लिहाज़ से, अपनी प्रतिभा के बेहतरीन उपयोग के लिए तत्पर रहने की ज़रूरत है।
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आज जब दुनिया के उन्नत राष्ट्र, सहनशीलता और उदारता के उस प्राचीन संदेश के लिए हमारी तरफ़ टकटकी लगाए हुए है, तो क्या यह सही होगा कि वर्गवाद-संप्रदायवाद में फँसकर हम ख़ुद को इस हद तक गिरा लें कि हमें यही सबक़ दूसरों से सीखने की नौबत आ जाए।
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