C/O बंगाल : शरतचंद्र के दिन
“मेरी विद्या-बुद्धि कुछ भी नहीं थी। बहुत दरिद्रता में दिन कटे हैं। बीस रुपये के अभाव में मैं परीक्षा में बैठने तक से वंचित रह गया था। ऐसे दिन भी आए, जब भगवान् से प्रार्थना करता था—‘हे भगवान्, कुछ दिन
“मेरी विद्या-बुद्धि कुछ भी नहीं थी। बहुत दरिद्रता में दिन कटे हैं। बीस रुपये के अभाव में मैं परीक्षा में बैठने तक से वंचित रह गया था। ऐसे दिन भी आए, जब भगवान् से प्रार्थना करता था—‘हे भगवान्, कुछ दिन