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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

यह जगत् न आशावादी है, न निराशावादी—वह दोनों का मिश्रण है और अंत में हम देखेंगे कि सभी दोष प्रकृति के कंधों से हटाकर, हमारे अपने ऊपर रख दिया जाता है।