श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण
तुम्हारा बंधु अगर असत् भी हो, उसे न त्यागो; बल्कि प्रयोजन होने पर उसका संग बंद करो, किंतु अंतर में श्रद्धा रखकर, विपत्ति-आपत्ति में कायमनोवाक्य से सहायता करो और अनुतप्त होने पर आलिंगन करो।
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