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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम विषय में जितना आसक्त होते हो, विषय-संबंध में तुम्हारा ज्ञान भी उतना ही होता है। जीवन का उद्देश्य है, अभाव को एकदम भगा देना और यह केवल कारण को जानने से ही हो सकता है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद