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भर्तृहरि के उद्धरण

सूर्य के उदय-अस्त होने से दिन-दिन आयुष्य घटती जाती है, अनेक कार्यों के भार के कारण व्यापार में व्यतीत काल जाना नहीं जाता; और जन्म, वृद्धापन, विपत्ति तथा मृत्यु देखकर भी त्रास नहीं होता, इससे यह निश्चित हुआ कि मोहमयी प्रमादरूपी मदिरा पीकर जगत् मतवाला हो रहा है।