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महादेवी वर्मा के उद्धरण

स्त्री के हृदय से जब स्नेह का बहिष्कार हो जाता है, उसकी कोमलतम भावनाएँ जब कुचल दी जाती है, तब वह भी कोई और ही प्राणी बन जाती है। उसमें फिर गरिमामय स्त्रीत्व की प्राणप्रतिष्ठा करने के लिए, मनुष्य की ही अजस्त्र सहानुभूति तथा स्निग्धतम स्नेह चाहिए।