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महादेवी वर्मा के उद्धरण

स्त्री केवल पत्नी के रूप में समाज का अंग नहीं है, अतः उसे उसके भिन्न-भिन्न रूपों में व्यापक तथा सामान्य गुणों द्वारा ही समझना, समाज के लिए आवश्यक तथा उचित है।