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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

शब्द अरण्य की सत्ता को एक दृष्टि से समझाते हैं, छवि की भाषा उसे एक अन्य दृष्टि से समझाएगी।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी