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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

वीणा तो देखी जा सकती है किंतु सुर को नहीं देखा जा सकता है; किंतु उस सुर से यह पहचाना जा सकता है कि वीणा बज रही है।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी