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कुँवर नारायण के उद्धरण

समीक्षा की संस्कृति मनुष्य के सांस्कृति विकास, बल्कि उसकी संस्कृति और विकास के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ी हुई चेष्टा है।