Font by Mehr Nastaliq Web

कुँवर नारायण के उद्धरण

समीक्षा जब भी यह विवेक खो देगी कि एक साहित्यिक रचना सबसे पहले एक कलाकृति है, महज़ एक कार्यक्रम नहीं—समीक्षा की साख कमज़ोर पड़ जाएगी।