Font by Mehr Nastaliq Web

दुर्गा भागवत के उद्धरण

रोग भोगते वक्त व्यथा के अंदर एक नाजुक सत्य छुपा होता है—परम नम्रता का सत्य—जो आर्त्त के भक्तिभाव में रहता है, कृष्ण द्वारा उल्लिखित है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर